Tuesday, February 25, 2025

MUKTII ( AADHYAATMIK )

 

                                 मुक्ति 


प्रेम साधना कर लो बंधु ,जग के पालनहार से ,

ये साधना की जो तुमने , तो भक्ति है ,

यदि समझे साधना को , तो शक्ति है , 

और यदि पा गए उसे , तो मुक्ति है  || 


भक्ति ही तो तुम्हारी शक्ति है ,

इसी शक्ति से ही  तो , तुम बलशाली बनोगे ,

मुक्ति पा कर ही तो  तुम ,

कर लोगे इस भवसागर  को पार दोस्तों  || 


जिंदगी के इस रूप को , अपना लो ,

जीवन सुंदर और सबल , बना लो , 

तभी तो तुम उस , रचनाकार की ,

छत्र छाया में रहकर उसका , प्यार पा लो  || 

 

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