क्या हुआ ?
राहों में चलते - चलते ,कदमों के बढ़ते - बढ़ते ,
जो कुछ हमने करना चाहा ,
दिल से वही किया ,पर पता नहीं क्यों ??
जो करना चाहा था ,और जो किया ,
वही नहीं हुआ ,कुछ और ही हो गया ,पता नहीं क्यों ??
ऐसे में ही ,मिला कुछ और ही ,
और वह भी समझ में नहीं आया ,
क्या मिला था ? पता नहीं क्यों ??
सब कुछ समझ से परे था ,
उसका एक सिरा भी ,पकड़ में आ जाता ,
तो शायद सब कुछ सुलझ जाता ,
मगर कौन बता सकता है ?
कि ऐसा क्यों हुआ ? हमें तो पता ही नहीं क्यों ??
No comments:
Post a Comment