अनंत आकाश
ईश्वर की बनाई इस दुनिया में ,सागर,धरती,आकाश हैं ,
तीनों ही मानव के जीवन का , आधार स्तंभ हैं ,
इन्हीं से मानव की सभी , जरूरतें पूरी होती हैं ||
सागर में जीवन पनपा , आया फिर धरती पर ,
धरती ने उसे पाला पोसा ,
अधिक से अधिक जरूरतें पूरी कीं ,
माँ के समान मानव को ,प्यार से संवारा उसका जीवन ||
आकाश ने मानव को सुंदर ,
सूरज ,चाँद ,तारों से भरपूर छत दी ,
आकाश एक पर्त नहीं है , वह अनंत है ,
हमारी दृष्टि तो उस अनंत तक ,पहुँच ही नहीं सकती ||
हमारी सोच , हमारे विचार तो ,उस अनंत तक पहुँचते हैं ,
उस अनंत में पहुँच कर ,उसे भी गुंजायमान करते हैं ,
और तब वह अनंत मुस्कुरा कर ,हमें अपने पास बुलाता है ,
तो चलो हम दूसरों की सोच ,जो अनंत में है ,
पूरा ध्यान लगा कर , सुनने की कोशिश करते हैं ||
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