गलियाँ बचपन की
कुछ थीं बातें दिल में , दिल में ही रह गईं ,
पुराने समय को याद करके , आँखें नम हो गईं ,
यादों का सिलसिला , जब शुरू हो जाता है ,
धीरे - धीरे वह बचपन की , गलियों में ले गया ||
बचपन के दोस्त तो , दूर ही हो गए ,
प्यार भरे हाथ अब ,छूट कर दूर हो गए ,
उन्हीं की यादें बहुत ही , सुंदर बन गईं ,
लगता है वे सब उन्हीं , गलियों में बस गईं ||
कभी - कभी लगता है , वो दोस्त मिल जाएँ ,
उसी तरह हम सब , महफिलें सजाएँ ,
हम सभी फिर से , मुस्कानें सजाएँ ,
कहकहे लगाएँ , और खिलखिलाएँ ||
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