Saturday, December 27, 2025

GALIYAAN BACHPAN KII ( JIVAN )

 

                        गलियाँ  बचपन की 

 

कुछ थीं बातें दिल में , दिल में ही रह गईं  ,

पुराने समय को याद करके , आँखें नम हो गईं ,

यादों का सिलसिला , जब शुरू हो जाता है  ,

धीरे - धीरे वह बचपन की , गलियों में ले  गया  ||  

 

बचपन के दोस्त तो , दूर ही हो गए ,

प्यार भरे हाथ अब ,छूट कर दूर हो गए  ,

उन्हीं की यादें बहुत ही , सुंदर बन गईं  ,

लगता है वे सब उन्हीं  , गलियों  में बस गईं  || 

 

कभी - कभी लगता है , वो दोस्त मिल जाएँ  ,

उसी तरह हम सब  , महफिलें सजाएँ  ,

हम सभी फिर से  , मुस्कानें सजाएँ  ,

कहकहे लगाएँ , और खिलखिलाएँ   ||   

 

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