Thursday, July 16, 2020

BACHPAN KEE BARISH AUR KAGAJ KEE NAAV ( SHORT STORY ) MAU. FES .

     
 
    बचपन की बारिश और कागज की नाव

जब हम छोटे बच्चे थे ,और छम - छम बारिश आती थी ,
पानी भर जाता सारे में ,हम कागज की नाव चलते थे |

ऊपर से बारिश आने पर , नावों में पानी भर जाता ,
पानी भर जाने से दोस्तों , नावों का कारवां डूब जाता |

नावों को बचाने की खातिर ,हम घर से छतरी लाते थे ,
छतरी को नावों के ऊपर खोल ,डूबने से उन्हें बचाते थे |

छतरी को नावों के ऊपर ही ,लेकर हम चलते जाते थे ,
ऐसी बारिश में हम दोस्तों ,भीगते ही चले जाते थे |

हम भीगें -भागें जो कुछ हो ,नाव हमारी बची रहे ,
उस बारिश के पानी में , नाव हमारी चलती रहे |

वो कागज़ की कश्ती ,वो बारिश का पानी ,
हमेशा याद आएगी ,वो हमको कहानी |

आज तो कागज़ की कश्तियाँ ही नहीं हैं ,
सब कुछ है लेकिन , वो बचपन नहीं है |

काश कोई बरसात ,ऐसी भी आती ,
हमको हमारा ,बचपन लौटाती |

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