Monday, July 13, 2020

MERII DHARATII ( DESH )

               मेरी धरती

मेरा देश ,मेरी धरा , इसको गर छू लो जरा ,
इसी के हो जाओगे ,इसी में खो जाओगे |

इसकी हवाओं में प्यार है , सनसनाता इसरार है ,
गौर से जो तुम सुनो ,तुम भी सुन पाओगे  |

इसकी वादियों में गीत हैं ,गूँजता जीवन संगीत है ,
गौर से सुन लो जरा , तुम भी गुनगुनाओगे |

बर्फीली चोटियों से जो सरिताएँ बहती हैं ,
उनकी कल - कल में तो ,तुम भी बह जाओगे |

मेरी धरा के सीने से ,फसलें जो उगती हैं ,
उनको गर तुम चखो ,तुम भी पनप जाओगे |

लहराता सागर यहाँ ,खुद तो बहुत शांत है ,
पर उसकी लहरों को तो ,शैतान बच्चियाँ पाओगे |

कितने गुण हैं ,मेरे देश की धरती में ?
मैं तो नहीं जानती ,ना ही तुम जान पाओगे |

No comments:

Post a Comment