Sunday, July 19, 2020

NALA -NALA JINDGEE (SHORT STORY ) MAU FES

नाला - नाला जिंदगी

बदरा कुछ ऐसे बरसे हैं आज ,
मानों बदरा की चारदीवारी टूटी है आज ,
पानी की रफ़्तार ऐसी बढ़ी ,
नदिया उफन कर शहरों में घुसी |

सड़कों पे पानी बहने लगा ऐसे ,
गाड़ियाँ नहीं चल पाएंगी जैसे ,
पैदल भी जनता चलेगी फिर कैसे ?
नावों की ही जरूरत है जैसे |

लगता नहीं है ये शहर के जैसा ,
पानी घुसा है घरों में ये ऐसा ,
सामान सारा पानी में डूबा ,
हुआ ये अचानक नुकसान कैसा ?

शहर का सारा कचरा पानी में घुला है ,
लगता है जैसे नाला ही बह  रहा है ,
कोई सूखी जगह तो घर में नहीं है ,
हरेक जन तो जैसे नाले में रह रहा है |

डूब गई जैसे जिंदगी नाले में ,
रोक नहीं सकते पानी को ताले में ,
कैसे रोकें नदिया के इस उफान को हम ?
जीना पड़ रहा है हम सभी को नाले में |


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