Saturday, July 18, 2020

KISAN KEE BAARISH ( SHORT STORY ) MAU FES

किसान की बारिश

गर्मी में धरती तपती ,
सूखी मिट्टी उड़ती जाती है ,
जोता  खेत किसानों ने ,
गर्मी पसीना बहाती है,
पोंछ पसीना ,करता मेहनत ,
मिट्टी करे मुलायम वो ,
घटे  नहीं मुस्कान होंठों की ,
उम्मीद का दामन थामे वो |

बदरा का रस्ता वो देखे ,
 दे आवाज बुलाता है ,
पवन जब आए तब उसको ,
अपना संदेस सुनाता है ,
पवन भी आती -जाती रहती ,
बदरा तक पहुँचाती संदेसा ,
बदरा भी अपना संदेसा ,
किसानों तक पहुँचाता है |

बदरा भी झुंडों में आकर ,
खुशी बिखराते हैं ,
किसानों के खेतों में ,
रिमझिम फुहारें लाते हैं,
तब किसान बोते खेतों में ,
उम्मीदों के बीज नए ,
जिससे हरियाली छाए खेतों में ,
खूब सुनहरी फसल उगे |

छाया बदरा की मिले खेत को ,
पानी भी भरपूर मिला ,
अंकुर फूटे बीजों से ,
तेजी से पौधे खूब बढ़े ,
मेहनतकश किसान ने ,
देखा अपने खेतों को ,
बढ़ती फसलों को देखा ,
तो होंठों पे मुस्कान बढ़े |

हरियाली के बीच फसल में ,
निकलीं सुनहरी बालियाँ ,
देख बालियाँ दिल किसान का ,
खूब बजाए तालियाँ ,
सफल हुई मेहनत किसान की ,
फसल तो भरपूर हुई ,
कहा शुक्रिया बदरा से ,
तुमसे ही बरसात हुई |

हर साल इसी तरह बदरा ,
तुम बारिश ले आ जाना ,
मेरे खाली खेतों में ,
सुनहरा अन्न उपजा जाना ,
मेहनत तो तुम्हारी है किसान ,
मैं तो बस पानी लाता हूँ ,
साड़ी मेहनत से ही तो तुम ,
अन्नदाता कहलाते हो |

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